31 OCTOBER – BABA KI MURLI KAI AAJ KAI MAHAVAKAYA

31-10-2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “बापदादा” मधुबन

“मीठे बच्चे – बाप खिवैया बन आया है तुम सबकी नईया को विषय सागर से निकाल क्षीर सागर में ले जाने, अभी तुमको इस पार से उस पार जाना है”

प्रश्न: तुम बच्चे हर एक का पार्ट देखते हुए किसकी भी निंदा नहीं कर सकते हो – क्यों?

उत्तर: क्योंकि तुम जानते हो यह अनादि बना-बनाया ड्रामा है, इसमें हर एक एक्टर अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं। किसी का भी कोई दोष नहीं है। यह भक्ति मार्ग भी फिर से पास होना है, इसमें जरा भी चेन्ज नहीं हो सकती।

प्रश्न: किन दो शब्दों में सारे चक्र का ज्ञान समाया हुआ है?

उत्तर: आज और कल। कल हम सतयुग में थे, आज 84 जन्मों का चक्र लगाकर नर्क में पहुँचे, कल फिर स्वर्ग में जायेंगे।

धारणा के लिए मुख्य सार:

1) अब यह झाड़ पुराना जड़जड़ीभूत हो गया है, आत्मा को वापस घर जाना है इसलिए अपने को सब बन्धनों से मुक्त कर हल्का बना लेना है। यहाँ का सब कुछ बुद्धि से भूल जाना है।

2) अनादि ड्रामा को बुद्धि में रख किसी भी पार्टधारी की निंदा नहीं करनी है। ड्रामा के राज़ को समझ विश्व का मालिक बनना है।

वरदान: बुद्धि के साथ और सहयोग के हाथ द्वारा मौज का अनुभव करने वाले खुशनसीब आत्मा भव

जैसे सहयोग की निशानी हाथ में हाथ दिखाते हैं। ऐसे बाप के सदा सहयोगी बनना – यह है हाथ में हाथ और सदा बुद्धि से साथ रहना अर्थात् मन की लग्न एक में हो। सदा यही स्मृति रहे कि गाडली गार्डन में हाथ में हाथ देकर साथ-साथ चल रहे हैं। इससे सदा मनोरंजन में रहेंगे, सदा खुश और सम्पन्न रहेंगे। ऐसी खुशनसीब आत्मायें सदा ही मौज का अनुभव करती रहती हैं।

स्लोगन: दुआओं का खाता जमा करने का साधन है – सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना।

OM SHANTI
PARWANO KA GROUP
(BRAHMA KUMARIS)

Essence: Sweet children, the Father has come here as the Boatman to remove the boats of all of you from the ocean of poison and to take you to the ocean of milk. You now have to go from this side to the other side.

Question: By observing the part of each one, why can you children not defame anyone?

Answer: Because you know that this drama is eternally predestined. Each actor is playing his own part within it. No one can be blamed for anything. This path of devotion has to be passed through again. There cannot be the slightest change in that.

Question: In which two words is the knowledge of the whole cycle merged?

Answer: Today and tomorrow. Yesterday, we were in the golden age. Today, having been around the cycle of 84 births, we have reached hell and, tomorrow, we will go to heaven again.

Essence for Dharna:

1- This tree has now become old and decayed. Souls now have to return home. Therefore, free yourself from all bondages and make yourself light. Remove everything of here from your intellect.

2- Keep the eternal drama in your intellect and do not defame any actor. Understand the secrets of the drama and become a master of the world.

Blessing: May you be a fortunate soul who experiences pleasure with the company of the intellect and co-operation of the hand.

The sign of co-operation is portrayed with a hand in a hand. To be constantly co-operative with the Father is to have your hand in His hand and to stay constantly in His company with the intellect means to have love for One in your heart. Always have the awareness that you are walking in a Godly garden, hand in hand with Him. By doing so, you will constantly be entertained, constantly be happy and full. Such fortunate souls constantly continue to experience pleasure.

Slogan: The way to accumulate in your account of blessings is to remain content and make others content.

OM SHANTI
PARWANO KA GROUP
(BRAHMA KUMARIS)

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